जन लोकपाल बिल को केंद्र की
मंजूरी के बिना सीधे विधानसभा में पेश करने को लेकर आम आदमी पार्टी की
सरकार अड़ गई है। इसके लिए केंद्र सरकार से उलझने के बाद 'आप' ने अब
उपराज्यपाल नजीब जंग को टारगेट पर ले लिया है। पार्टी ने आरोप लगाया है कि
उपराज्यपाल कांग्रेस के एजेंट के तौर पर काम कर रहे हैं। पार्टी प्रवक्ता
आशुतोष ने कहा कि लोकपाल बिल को लेकर उपराज्यपाल और सॉलिसिटर जनरल के
बातचीत लीक कैसे हुई।
दरअसल, सरकार जनलोकपाल बिल को सीधे विधानसभा से पास कर लागू करना चाहती है, लेकिन देश के सॉलिसिटर जनरल मोहन परासरन ने स्पष्ट कर दिया है कि बिल को विधानसभा में पेश करने से पहले उपराज्यपाल और केंद्र से मंजूरी जरूरी है। सरकार का तर्क है कि यह बिल फाइनैंस से जुड़ा नहीं है, इसलिए इस प्रकार की मंजूरी जरूरी नहीं है। इसके अलावा बिल लागू करने को लेकर वह संविधान विशेषज्ञों से भी राय ले चुकी है। फिलहाल बिल पर 'संघर्ष' बढ़ता ही जा रहा है। इस मसले पर आज मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल उपराज्यपाल से मिल रहे हैं तो कांग्रेस नेता भी इसी मसले पर सरकार की जिद को लेकर उपराज्यपाल से मिलेंगे।
इस बिल को लेकर उपराज्यपाल ने सॉलिसिटर जनरल से राय मांगी थी। उनका कहना है कि संसद से पिछले साल पास हो चुका लोकपाल और लोकायुक्त कानून लागू हो चुका है। ऐसे में दिल्ली में लोकपाल बिल लाना केंद्र के कानून के खिलाफ होगा। इसके लिए राष्ट्रपति की मंजूरी लेने की जरूरत होगी। इसका अर्थ यही निकलता है कि यह बिल उपराज्यपाल के पारित करवाकर ही उसे राष्ट्रपति के पास भेजना होगा। इस पर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सुबह कहा कि उन्होंने संविधान विशेषज्ञों से इस बिल पर राय ले ली है और वह इस राय को उपराज्यपाल तक पहुंचाएंगे।
दरअसल, सरकार जनलोकपाल बिल को सीधे विधानसभा से पास कर लागू करना चाहती है, लेकिन देश के सॉलिसिटर जनरल मोहन परासरन ने स्पष्ट कर दिया है कि बिल को विधानसभा में पेश करने से पहले उपराज्यपाल और केंद्र से मंजूरी जरूरी है। सरकार का तर्क है कि यह बिल फाइनैंस से जुड़ा नहीं है, इसलिए इस प्रकार की मंजूरी जरूरी नहीं है। इसके अलावा बिल लागू करने को लेकर वह संविधान विशेषज्ञों से भी राय ले चुकी है। फिलहाल बिल पर 'संघर्ष' बढ़ता ही जा रहा है। इस मसले पर आज मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल उपराज्यपाल से मिल रहे हैं तो कांग्रेस नेता भी इसी मसले पर सरकार की जिद को लेकर उपराज्यपाल से मिलेंगे।
इस बिल को लेकर उपराज्यपाल ने सॉलिसिटर जनरल से राय मांगी थी। उनका कहना है कि संसद से पिछले साल पास हो चुका लोकपाल और लोकायुक्त कानून लागू हो चुका है। ऐसे में दिल्ली में लोकपाल बिल लाना केंद्र के कानून के खिलाफ होगा। इसके लिए राष्ट्रपति की मंजूरी लेने की जरूरत होगी। इसका अर्थ यही निकलता है कि यह बिल उपराज्यपाल के पारित करवाकर ही उसे राष्ट्रपति के पास भेजना होगा। इस पर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सुबह कहा कि उन्होंने संविधान विशेषज्ञों से इस बिल पर राय ले ली है और वह इस राय को उपराज्यपाल तक पहुंचाएंगे।
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