Friday, 7 February 2014

राहुल को मनमोहन का उपदेश

सुरक्षित गोस्वामी
आजकल मनमोहन के
मन में प्रबल भावना है कि अगले चुनाव में कांग्रेस जीते और PM पद राहुल के पास आ जाए! वैसे भी ऐसा भाव होना स्वाभाविक है, जैसे पिता, पुत्र को अपने सामने आगे बढ़ता देखना चाहता है ऐसे ही गुरु भी शिष्य को उंचाइयों पर देखना चाहता है। राहुल तो मनमोहन को हृदय से अपना राजनीतिक गुरु मानते ही हैं। इसी कारण मनमोहन की इच्छा है कि मैं राजनीति की बारीकियों को राहुल को वैसे ही सिखा दूं जैसे अध्यात्म में गुरु,शिष्य को सीखाता है। गुरु, शिष्य को शिष्य नहीं बल्कि गुरु ही बनाने की कोशिश में रहता है। गुरु चाहता है कि शिष्य मेरे से भी बेहतर होता जाए।

मनमोहन कहते हैं, 'हे राहुल वैसे तो तुम पब्लिक में अच्छा बोल लेते हो लेकिन अपने बोलने की कला को दिन-प्रतिदिन निखारते जाओ क्योंकि अच्छा वक्ता होना नेता का प्रमुख गुण है। जनता की मनोस्थिति को ध्यान में रखकर भाषण दो। भाषा में ठहराव व आवाज़ में दबंगता हो। शब्द बड़े नपे-तुले व प्रभावी हों, साथ ही जो बातें जनता से करो उनको पूरा करते जाओ क्योंकि अधिकतर नेता ख्याली पुलाव बनाते रहते हैं। हे मेरे प्यारे 'हिंदी भाषा पर अपनी पकड़ बढाते जाओ। हिंदी भाषा की एक खूबी है कि इस भाषा में शब्दों के बीच में थोड़ा ठहराव होता है जिससे सुनने वाले के दिलों-दिमाग पर आपके शब्दों का असर होने लगता है, जबकि अंग्रेजी भाषा जल्दी-जल्दी बोली जाती है। राहुल, तुम इसके लिए अधिक से अधिक सभाओं में बोलते रहो और देश के प्रमुख वक्ता बन जाओ। मुझे कभी-कभी लोग इसी बात से ना पसंद करते हैं कि मैं कम बोलता हूं। इसलिए प्रिय शिष्य तुम मेरी इस कमी को अपने द्वारा पूरा कर दो तो ये मेरी गुरु दक्षिणा होगी।

राहुल, तुम हमेशा उत्साह व धैर्य में रहो और जब देशहित में कठोर कदम उठाने की बात आए तो पीछे ना हटना, भले तुम्हारा कितना भी विरोध क्यों ना हो। मैं तुमको अपने पिछले नौ सालों के PM पद का अनुभव देने को उत्सुक हूं, जिससे तुम इस कांटों से भरे तख़्त पर कभी मार ना खाओ। यहां सभी दलों को संभाल कर चलना होता है। मैं तो चाहूंगा कि हमारी पार्टी का बहुमत आए लेकिन यदि बहुमत न आया तो गठबंधन की सरकार बनेगी और सबको खुश रखना भी तुमको आना चाहिए।

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