समय, सफलता की कुंजी है। समय का चक्र अपनी
गति से चल रहा है या यूं कहें कि भाग रहा है। अक्सर इधर-उधर कहीं न कहीं,
किसी न किसी से ये सुनने को मिलता है कि क्या करें समय ही नही मिलता।
वास्तव में हम निरंतर गतिमान समय के साथ कदम से कदम मिला कर चल ही नही पाते
और पिछङ जाते हैं। समय जैसी मूल्यवान संपदा का भंडार होते हुए भी हम हमेशा
उसकी कमी का रोना रोते रहते हैं क्योंकि हम इस अमूल्य समय को बिना सोचे
समझे खर्च कर देते हैं।
विकास की राह में समय की बरबादी ही सबसे
बङा शत्रु है। एक बार हाँथ से निकला हुआ समय कभी वापस नही आता है। हमारा
बहुमूल्य वर्तमान क्रमशः भूत बन जाता है जो कभी वापस नही आता। सत्य कहावत
है कि बीता हुआ समय और बोले हुए शब्द कभी वापस नही आ सकते।Friday, 21 February 2014
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